Sunday, December 18, 2011

kuch alfaaaz...



जिंदगी बीत जाती है कभी 
औरों के नगमों को जीने में 
और अपने दिल के तराने 
खोये रहते है दूर तहखाने में....

ख्वाब तो रोज़ देखते है आँखों में 
आसमान के , चाँद सितारों के...
कभी दिन बीत जाता है रात के इंतज़ार में,
और रात के सन्नाटे सुला देते है अरमान दिन के...

लगता है आज की रात कुछ १०० साल जीनेवाली है..
सुबह होते होते करोडो पल जगानेवाली है..
जितना भी इतराओ.. चाहो जितना ठुकराओ..
सुबह आते हुए मेरी मंजिल लानेवाली है !! 

                                         - अभिजीत कुलकर्णी..